AM- स्वयमेव प्रिय आमिल सच्चसँग स्वयमेव जिस तरह नदी पहाड़ों से निकलती हैं, तो उसके पास अपनी मंजिल यानि समुद्र तक पहुंचने का कोई नक्शा नहीं होता। परन्तु वह नदी अपना रास्ता स्वयं बनाती…

AM- स्वयमेव प्रिय आमिल सच्चसँग स्वयमेव जिस तरह नदी पहाड़ों से निकलती हैं, तो उसके पास अपनी मंजिल यानि समुद्र तक पहुंचने का कोई नक्शा नहीं होता। परन्तु वह नदी अपना रास्ता स्वयं बनाती…

AM Post- उद्देश्य प्रिय आमिल सचसँग उद्देश्य प्रश्न – इन्सान का जन्म किसलिये हुआ हैं ? उत्तर – इन्सान का जन्म बचपन में दिन में आठ घंटे शिक्षा ग्रहण करने के बाद युवाअवस्था में आठ…

AM- कोशिश-कर्म प्रिय आमिल सच्चसँग कोशिश-कर्म इन्सान का कोई काम अपने आप नहीं बनता बल्कि प्रारब्ध, भाग्य, सन्तुलित नज़रियापूर्वक, साधना, प्रेयर, माइंडसेट, एक्टिव मूड, पुरुषार्थ और मार्केटिंग के साथ साथ सद्गुरु यानि भगवान का…